नीतिशतक1️⃣4️⃣🕉️1️⃣5️⃣🕉️1️⃣6️⃣

 🕉️नीतिशतक1️⃣4️⃣🕉️1️⃣5️⃣🕉️1️⃣6️⃣

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येषां न विद्या न तपो न दानम्,

 ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः।

 ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः,

मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति॥14॥ 

🇮🇳अन्वयः-येषां विद्या न, तपः न, ज्ञानं, शीलं न, गुणः, धर्मः न, ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः (सन्तः) मनुष्यरूपेण मृगाः चरन्ति।

🇮🇳शब्दार्थ एवं व्याकरण-येषाम् = जिनके पास। विद्या न = कोई कला (हुन्नर) नहीं है। तपः न = जो परिश्रम हीन हैं या जिनके पास पूर्व श्रमार्जित सम्पत्ति नहीं है। ज्ञानं न = कोई ज्ञान नहीं है। शीलं न = सदाचरण नहीं हैं जो धार्मिक भी नहीं हैं यानि जो सत्य, अहिंसा एवं अस्तेय आदि के मार्ग के भी अनुयायी नहीं हैं। ते = वे। मर्त्यलोके = (मर्त्यानां लोकः मर्त्यलोकः तस्मिन् षष्ठी तत्पु० समास) मनुष्य लोक में। भुवि = इस भूमि पर। भारभूताः = भारस्वरूप हैं। मनुष्यरूपेण = मानव की शक्ल-सूरत में। मृगाः चरन्ति = हरिण या पशुओं की तरह विचरण करते हैं

🇮🇳हिन्दी-अनुवाद-भर्तृहरि जी कहते हैं कि जिन मनुष्यों के पास न तो कोई कला है, न पूर्वकृतश्रम है, न ज्ञान है, न सदाचरण है, न कोई सद्गुण है, न धर्म की शक्ति है; वे इस मनुष्य लोक में पृथ्वी पर भारस्वरूप ही हैं तथा मनुष्य होते हुए भी पशुओं की तरह इस लोक में विचरण करते हैं भावार्थ यह है कि मनुष्य होने के लिए अनिवार्य है कि उसके पास पशुओं की अपेक्षा कोई विशिष्ट कला हो,गुण हो या सदाचरण हो।

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वरं पर्वतदुर्गेषु, भ्रान्तं वनचरैः सह ,

न मूर्खजनसम्पर्कः, सुरेन्द्रभवनेष्वपि॥15॥ 

🇮🇳अन्वयः-पर्वतदुर्गेषु वनचरैः सह भ्रान्तं वरम् किन्तु मूर्खजनसम्पर्कः सुरेन्द्रभवनेषु अपि न (वरम्) । ..

🇮🇳. शब्दार्थ एवं व्याकरण-पर्वतदुर्गेषु (दुर्गाः दुर्गमा: ये पर्वता: तेषु पर्वतदुर्गेषु) = दुर्गम पर्वतों पर। वनचरैः सहः--जंगली लोगों के साथ। भ्रान्तम् = भ्रमण करना। वरम् = अच्छा है। मूर्खजनसम्पर्कः (मूर्खजनानां सम्पर्कः षष्ठी तत्पु० समास) मूर्ख लोगों का साथ। सुरेन्द्रभवनेषु = (सुरेन्द्रस्य भवनानि सुरेन्द्रभवनानि तेषु षष्ठी तत्पु० स०) इन्द्र के महलों में। अपि= भी। न (अच्छा) नहीं है।

🇮🇳 हिन्दी-अनुवाद-मूों की संगति की निन्दा करते हुए भर्तृहरि जी कहते हैं कि दुर्गम पर्वतों पर जंगली जीवों या वनवासियों के साथ रहना भी अच्छा है परन्तु मूर्यों के साथ देवराज इन्द्र के महलों में रहना भी ठीक नहीं है।

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शास्त्रोपस्कृतशब्दसुन्दरगिरः शिष्यप्रदेयागमाः,

विख्याताः कवयो वसन्ति विषये यस्य प्रभोर्निर्धनाः। 

तज्जाड्यं वसुधाधिपस्य सुधियस्त्वर्थं विनाऽपीश्वराः,

कुत्स्याः स्युः कुपरीक्षका न मणयो यैरर्घतः पातिताः ॥16॥ 

🇮🇳अन्वयः-शास्त्रोपस्कृतशब्दसुन्दरगिरः शिष्यप्रदेयागमाः विख्याताः कवयः यस्य प्रभोः विषये निर्धना: वसन्ति, तत् वसुधाधिपस्य जाड्यम्। सुधियः तु अर्थं विना अपि ईश्वराः। यैः मणयः अर्घतः पातिताः कुपरीक्षकाः कुत्स्याः स्युः ।

🇮🇳शब्दार्थ एवं व्याकरण-शास्त्रोपस्कृत = (शास्त्र + उपस्कृत गुणसन्धि) शास्त्रों द्वारा परिष्कृत । शब्दसुन्दरगिरः = सुशब्दों से युक्त सदुपयोगी वचन बोलने वाले। शिष्यप्रदेयागमाः = शिष्यों को पढ़ाने योग्य शास्त्रों के ज्ञाता। विख्याताः कवयः = सुप्रसिद्ध विद्वान् । यस्य = जिस। प्रभोः= राजा के। विषये होकर। वसन्ति = रहते हैं। तत् = वह। वसुधाधिपस्य =  राजा का। जाड्यम् = मूर्खता या गलती है। सुधियः = विद्वान्। तु = तो। अर्थं विना = धन के विना। अपि, भी। ईश्वराः = ऐश्वर्यशाली होते हैं। यैः = जिनके द्वारा । मणयः = मणियों को। अर्धतः = मूल्य से। पातिताः = गिराया गया है यानि जो मणियों का समुचित मूल्यांकन न कर सके हैं। कुपरीक्षकाः = ऐसे अनाड़ी जौहरी। कुत्स्याः निन्दनीय। स्युः = हों (अस् विधिलिङ् प्र०पु० बहुवचन।)

🇮🇳हिन्दी-अनुवाद-भर्तृहरि जी कहते हैं कि शास्त्रों से परिष्कृत शब्दोंवाली मधुर वाणी बोलने वाले, शिष्यों के उपदेश योग्य शास्त्रों के ज्ञाता सुप्रसिद्ध कवि जिस राजा के राज्य में निर्धन होकर रहते हों, वह उस राजा की नाकामयाबी है क्योंकि विद्वान् तो धन के विना भी ऐश्वर्यशाली ही होते हैं। वस्तुतः वे कुपारखी ही निन्दनीय माने जाते हैं जो बहुमूल्य मणियों का समुचित मूल्यांकन नहीं कर सकते। (क्योंकि मणियों का इसमें कोई दोष नहीं होता है।) भावार्थ यह है कि गुणियों का सम्मान करना शासक का कर्तव्य है।

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Comments

  1. Poonam devi
    Sr no 23
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  2. Sejal kasav
    Major sub.- pol science.
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    Sr.no.-01

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  3. Roshan sr no 31 major Hindi

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  4. Rishav sharma major pol science sr no 65

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  5. Priyanka Devi
    Sr.no.23
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  6. Shivani Devi
    Sr no 46
    Major Hindi
    Minor history

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  7. Taniya sharma
    Sr no. 21
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  8. Name Akshita Kumari Major Political Science Sr. No. 70

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  9. Akriti choudhary
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    Sr.no 11

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  10. Divya Kumari
    Major political science.
    Sr.no 60.

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  11. Divya Kumari
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    Sr.no 60.

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  13. Riya thakur
    Sr. No. 22
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  14. Name Priyanka devi,Major History,Ser No 30

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  15. Name tanuGuleria
    Sr. No.32
    Major political science

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  16. Mehak
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  17. Sejal kasav
    Major sub.- pol science
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    Sr.no.01

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  18. Name Sakshi
    Sr no 14
    Major Hindi
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  19. Name Leela Devi
    SR no 41 major hindi

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  20. Sujata sharma. Sr. No. 8 major history

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  21. Name rahul kumar
    Major- history
    Sr no. 92

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  22. Name rahul kumar
    Major- history
    Sr no. 92

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  23. Chetan Choudhary major pol science minor Hindi sr no 13

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  24. Pallvi choudhary
    Major- pol. Sc
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    Sr.no- 72

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  25. Mamta Bhardwaj
    Sr no 01
    Major history

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  26. Mamta Bhardwaj
    Sr no 01
    Major history

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  27. Name_ Shivani
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    Major Hindi

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  28. Name jyotika Kumari Major hindi Sr no 5

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  29. Anjli
    Major - political science
    Minor - history
    Sr.no -73

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  30. Sonali dhiman political science Sr. no. 19

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  31. ektaekta982@gmail.com
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  32. Tanvi Kumari
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