मातृचेट

 मातृचेट

महायानी बौद्ध पंडित व स्तोत्रकवि । स्तोत्र-साहित्य के प्रवर्तक।

भारत के बाहर विशेष ज्ञात तथा आदृत। पाश्चात्य विद्वानों

द्वारा खोतान तथा तुरफान से विशेष ग्रंथों का अन्वेषण कर

इनके ग्रन्थों का प्रकाशन किया गया महापण्डित राहुल

सांकृत्यायन ने महत्प्रयास से कवि के 'अध्यर्ध-शतक' (बुद्ध

स्तोत्र) की मूल संस्कृत प्रति तिब्बल के विहार से प्राप्त की

(1926) । इनके तथा अन्य अन्वेषण से विन्टरनिट्झ तथा

तारानाथ ने कवि के जीवन पर कुछ प्रकाश डाला है। तदनुसार

पूर्वायुष्य में काल नामक ब्राह्मण और शिवोपासक

मातृचेट थे। नालन्दा में बौद्ध-केन्द्र पर शास्त्रार्थ में पराजित होने पर

बौद्ध संघ में समाविष्ट हुए। आर्यदेव इनके धर्मपरिवर्तक थे।

कुछ जीवनीकारों के अनुसार, इन्होंने क्षुधित व्याघ्री को शरीरार्पण

किया।

रचनाएं- चतुःशतक और अध्यर्धशतक। तन्जौर के ग्रंथालय

में इनके नाम पर 11 कृतियों का उल्लेख है- (1)

वर्णनाथ-वर्णन,त्रिरत्नमंगल-स्तोत्र,सुगत-पंचत्रिरत्न-स्तोत्र, (6) त्रिरत्न-स्तोत्र, (7) मिश्रक-स्तोत्र,(৪) चतुर्विपर्यय-कथा, "(9) कलियुग परिकथा, (10) आर्यतारादेवी-स्तोत्र (सर्वार्थसाधननाम-स्तोत्रराज) और (11)मतिचित्र-गीति। ये रचनाएं मूल संस्कृत में अनुपलब्ध है।नेपाल में उपलब्ध हस्तलेखों के अनुसन्धान से इनमें से कुछ प्राप्त हो सकती हैं।

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