♏मनु वैवस्वत♏

 मनु वैवस्वत - ऋग्वेद के 8 वें मंडल के 27 से 31 तक

के सूक्तों के द्रष्टा। इन सब सूक्तों का विषय विश्वेदेवस्तुति

है। इनमें से 29 वां सूक्त प्रसिद्ध कूटसूक्त है। उसमें 10

ऋचायें है। प्रत्येक ऋचा की स्वतंत्र देवता का स्थूल चिन्ह

से कूटसदृश उल्लेख इस प्रकार है-

1. बभ्र (सोम), 2. योनि (अग्नि), 3. वाशी (त्वष्टा),

4. वज्र (इंद्र), 5. जलाषभेषज (रुद्र), 6. पथ (पूषा), 7.

उरुधनु (विष्णु), 8. सहप्रवासी (अश्विनीकुमार) , 9. सम्राट्

(मित्रावरुण), 10. सूर्यप्रकाश (अत्रि अथवा सूर्य) ।

30 वें सूक्त की देवता अश्विनी है। 31 वें सूक्त में

यजमान-प्रशंसा, दंपतीप्रशंसा तथा दंपती को आशीर्वाद है।

इसे ऋग्वेद में मनुसावण्णीं संज्ञा है। कहते हैं कि वैवस्वत

इनका पैतृक नाम है और सावर्णी मातृवंशसूचक नाम है।

यदु, तुर्वश, मनु वैवस्वत के समकालीन तथा मांडलिक

थे। ये इंद्र के कृपापात्र थे। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार

जलप्रलय से जगत् की इन्होंने रक्षा की थी। ये दानशूर थे।


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